बहुत सारे लोगों के साथ एक कॉमन प्रॉब्लम होती है – “मुझे बहुत सारे इंग्लिश वर्ड्स आते हैं, लेकिन बोलते समय वो याद नहीं आते!” यही फर्क है एक्टिव वोकैब्युलरी और पैसिव वोकैब्युलरी का। चलिए इस अंतर को अच्छे से समझते हैं और जानते हैं कि कैसे हम अपने पैसिव वर्ड्स को एक्टिव में बदल सकते हैं।
एक्टिव वोकैब्युलरी वो शब्द होते हैं जिन्हें आप आसानी से बोल सकते हैं, तुरंत लिख सकते हैं, और बिना सोचे यूज़ कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, जब आप कहते हैं “आई ऐम टायर्ड” – तो ये शब्द “टायर्ड” आपकी एक्टिव वोकैब्युलरी में है। आपको इसके बारे में सोचना नहीं पड़ता, ये अपने आप मुँह से निकल जाता है।
पैसिव वोकैब्युलरी वो शब्द होते हैं जिन्हें आप पढ़कर समझ जाते हैं, सुनकर पहचान लेते हैं, लेकिन खुद से यूज़ नहीं कर पाते। मिसाल के तौर पर, आप पढ़ते हैं – “ही वाज़ एक्सहॉस्टेड” और आप समझ जाते हैं कि इसका मतलब “बहुत थका हुआ” है। लेकिन जब आपको खुद बोलना होता है, तो आप “एक्सहॉस्टेड” की जगह “टायर्ड” बोलते हैं। यही पैसिव वोकैब्युलरी है – आप शब्द को जानते हैं, लेकिन वो आपके इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं है।
दोनों के बीच का अंतर बहुत साफ है। एक्टिव वोकैब्युलरी से आप बोल और लिख सकते हैं। पैसिव वोकैब्युलरी से आप सिर्फ समझ सकते हैं। और हमारा लक्ष्य क्या होना चाहिए? हमारा लक्ष्य है कि हम अपने पैसिव वर्ड्स को एक्टिव वर्ड्स में बदलते जाएं।
समस्या कहाँ होती है? आप रोज यूट्यूब देखते हो, आर्टिकल्स पढ़ते हो, मूवीज देखते हो। इससे आपकी पैसिव वोकैब्युलरी तो बहुत बढ़ती है, लेकिन एक्टिव वोकैब्युलरी बिल्कुल नहीं बढ़ती। और यही वजह है कि आपकी फ्लूएंसी नहीं आती। आप सब कुछ समझते हो, लेकिन बोल नहीं पाते। तो अब जानते हैं समाधान क्या है।
समाधान यह है कि आप शब्दों को यूज़ करना सीखो। असली गेम यहीं से शुरू होता है। सबसे पहला और आसान तरीका है – 5 वर्ड्स रूल। हर दिन सिर्फ 5 नए शब्द लो। जैसे – एक्सहॉस्टेड, कॉन्फिडेंट, अचीव, इम्प्रूव, स्ट्रगल। अब हर शब्द से 2 सेंटेंस बनाओ। जैसे – “आई फील एक्सहॉस्टेड टुडे” और “आई वांट टू अचीव माय गोल्स”। इस तरह 5 शब्दों के 10 सेंटेंस रोज बनाने से शब्द धीरे-धीरे आपके एक्टिव जोन में आने लगेंगे।
दूसरा तरीका है – जोर से बोलने की टेक्नीक। सिर्फ पढ़ो मत, बल्कि जोर से बोलो। जैसे – “आई ऐम फीलिंग एक्सहॉस्टेड बिकॉज़ आई वर्क्ड अ लॉट”। जब आप शब्द को अपनी आवाज से बोलते हो, तो वो दिमाग में अच्छे से फिक्स हो जाता है। सिर्फ आँखों से पढ़ने से काम नहीं चलेगा, आपको मुँह से बोलना होगा।
तीसरा तरीका है – पर्सनल कनेक्शन मेथड। शब्दों को अपनी जिंदगी से जोड़ो। गलत तरीका यह है कि तुम कहो – “ही वाज़ एक्सहॉस्टेड आफ्टर रनिंग”। ये तो किताबी वाक्य है। सही तरीका यह है कि तुम कहो – “आई वाज़ एक्सहॉस्टेड आफ्टर माय जिम वर्कआउट”। जब तुम अपने जीवन से जुड़ा सेंटेंस बनाते हो, तो शब्द बहुत तेजी से सीखता है और कभी नहीं भूलता।
चौथा तरीका है – सिंपल वर्ड्स को रिप्लेस करना। तुम जो बेसिक वर्ड्स यूज़ करते हो, उन्हें अपग्रेड करो। जैसे – टायर्ड की जगह एक्सहॉस्टेड, हैप्पी की जगह डिलाइटेड, बिग की जगह मैसिव। रोज कम से कम दो ऐसे वर्ड्स रिप्लेस करो। जब तुम “आई ऐम हैप्पी” कहने वाले हो, तो रुको और सोचो – क्या आज मैं “डिलाइटेड” बोल सकता हूँ?
पाँचवाँ और सबसे ज़रूरी तरीका है – इंग्लिश में सोचना। जब तुम सोचते हो “मुझे बहुत थकान हो रही है” और फिर उसका ट्रांसलेट करते हो “आई ऐम टायर्ड” – यह ट्रांसलेशन का समय है जो तुम्हें रोकता है। इसके बजाय सीधा सोचो “आई ऐम एक्सहॉस्टेड”। यही फ्लूएंसी का असली सीक्रेट है। जब तुम अंग्रेजी में सोचना शुरू कर दोगे, तो बोलना अपने आप आसान हो जाएगा।
सबसे ज़रूरी बात यह है कि तुम्हें 10,000 शब्द जानने की जरूरत नहीं है। सिर्फ 500 से 1000 शब्द एक्टिव होने चाहिए। यही चीज लोगों को फ्लूएंट बनाती है। बहुत से लोग 5000 शब्द जानते हैं लेकिन बोल नहीं पाते, और कुछ लोग सिर्फ 800 शब्द जानते हैं लेकिन बड़ी फ्लूएंसी से बोलते हैं। फर्क एक्टिव वोकैब्युलरी का है, जानकारी का नहीं।
अंतिम सच्चाई यह है – पैसिव वोकैब्युलरी नॉलेज है, और एक्टिव वोकैब्युलरी स्किल है। नॉलेज से आप परीक्षा पास कर सकते हो, लेकिन स्किल से आप दुनिया से बात कर सकते हो। और फ्लूएंसी एक स्किल है, नॉलेज नहीं। इसलिए आज से शुरू करो – रोज 5 शब्द लो, उनके अपने सेंटेंस बनाओ, जोर से बोलो, और अपनी जिंदगी से जोड़ो। 30 दिनों में तुम खुद हैरान रह जाओगे कि तुम्हारे मुँह से वो शब्द अपने आप निकलने लगे हैं जो पहले कभी नहीं निकलते थे।